19 January 2017

ॐ का उच्चारण , मेडिटेशन , कपालभाती , अनुलोम-विलोम , भ्रामरी प्राणायाम और सूर्य नमस्कार कैसे करें ???




Meditation-Kapalbhati-Anulom-Vilom-Bhramri-Sury-Namaskar

ॐ का उच्चारण , मेडिटेशन , कपालभाती , अनुलोम-विलोम , भ्रामरी प्राणायाम और सूर्य नमस्कार कैसे करें ???


दोस्तों आज मैं आपको बताने जा रही हूँ ॐ का उच्चारण , मेडिटेशन , कपालभाती , अनुलोम-विलोम , भ्रामरी प्राणायाम और सूर्य नमस्कार कैसे करे .............. and I suggest की इससे पहले आप इस post को पढ़ लें ........ 5 Good /Healthy Habits in Hindi ..........





1. ॐ का उच्चारण सुबह-सुबह जल्दी उठकर किसी खुली और साफ़ जगह पर आसन बिछाकर पद्मासन में बैठे और आँखें बंदकर पेट से आवाज निकालते हुए जोर से ॐ का उच्चारण करे | ओ..........को जितना लंबा खीच सके खीचें | साँस भर जाने पर रुके और फिर धीरे-धीरे साँस को छोड़े और यही प्रक्रिया पुनः दोहराए कम-से-कम 3 से 5 बार | उच्चारण तेज आवाज में करें | उच्चारण ख़त्म करने के बाद 2 मिनट के लिए ध्यान लगाए और फिर उठ जाए |




2. मेडिटेशन / ध्यान = ध्यान के लिए कोई निश्चित समय नहीं है इसे आप किसी भी समय कर सकते है पर सबसे अच्छा समय सुबह उठने के just बाद का है क्योंकि इस समय हमारा mind fresh रहता है | ध्यान के लिए सबसे पहले किसी खुली और साफ़ जगह पर आसन बिछकर पद्मासन (Cross legged) में बैठे | अब धीरे-धीरे अपनी आँखों को बंद कीजिए और 2-3 बार गहरी साँस लें और धीरे-धीरे छोड़े और relax हो जाए  और फिर जितनी देर आप बैठ सके बैठे और फिर धीरे-धीरे आँख खोल लेंं |


3. कपालभाती प्राणायाम = सबसे पहले पद्मासन में बैठे और धीरे-धीरे साँस को बाहर फेंकते समय पेट को अंदर की तरफ धक्का दे | इसमें सिर्फ साँस को ही छोड़ते रहना है | दो साँस के बीच अपने आप साँस अंदर चली जाएगी | जानबूझकर साँस अंदर नहीं लेना है | "कपाल" कहते है मष्तिष्क के अग्र भाग को ...... "भाति" कहते है ज्योति को , क्रांति को , तेज को | कपालभाती प्राणायाम लगातार करने से चहरे का लावण्य बढ़ता  है | कपालभाती दह्रती की संजीवनी कहलाता है | कपालभाती प्राणायाम करते समय हमें ऐसा सोचना चाहिए कि हमारे शरीर के सभी negative thoughts शरीर से बाहर जा रहे है |




4. अनुलोम-विलोम प्राणायाम = पद्मासन में बैठकर नाक के दोनों नथुनों से पूरा श्वास बाहर निकाल दें | इसके बाद दाहिने हाथ के अंगूठे से नाक के दाहिने नथुने को बंद कर दे और बाएँ नथुने से धीरे-धीरे लम्बी साँस ले | As possible श्वास को रोक के रखे फिर बाएँ नथुने को मध्यमा अंगुली से बंद कर ले और दाहिने नथुने से धीरे-धीरे छोड़े | इस प्रकार श्वास को बाहर निकल दे और फिर दोनों नथुने को बंद करके श्वास को कुछ देर बाहर ही रोके | अब पुनः दाहिने नथुने से श्वास लें और फिर थोड़े समय तक रोककर बाएँ नथुने से श्वास धीरे-धीरे छोड़े | पूरा श्वास निकल जाने के बाद कुछ समय तक रोके रखे | अब इसी तरह से पुनः इसे बार-बार दुहराए |


5. भ्रामरी प्राणायाम = सर्वप्रथम पद्मासन में सीधे बैठ जाए | खूब गहरा साँस लेकर दोनों हाथ की तर्जनी (अंगूठे की पास वाली) ऊँगली से अपने दोनों कानों के छिद्र बंद कर ले | कुछ समय तक सांस रोके रखे | अब श्वास छोड़ते हुए होंठ बंद कर भौरों की तरह ॐ का दीर्घ गुंजन करे | श्वास खाली होने पर उंगुलिया बाहर निकाल ले | कम-से-कम 8 से 10 बार इसे रोज करें |


6. सूर्य नमस्कार =  सूर्य नमस्कार कैसे करें



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