06 September 2016

राजा विक्रमादित्य के तीन प्रश्न (Story on God in Hindi)



                 

                     राजा विक्रमादित्य के तीन प्रश्न (Story on God in Hindi)


       !! राजा विक्रमादित्य के तीन प्रश्न !!



एक बार राजा विक्रमादित्य के मन में तीन प्रश्न उठे | पहला यह कि - "भगवान से पहले कौन था ?"

दूसरा - "भगवन कहाँ रहते है ?"

और उनका तीसरा प्रश्न था  - "भगवन करते क्या है ?'

 इसका उत्तर पाने के लिए उन्होंने अपने राज्य में घोषणा की - जो मेरे तीन प्रश्नों का उत्तर सही सही देगा उसको मैं अपना आधा राज्य दे दूँगा ,अन्यथा वह कठोर दंड का भागी होगा | उनके राज्य में किसी भी व्यक्ति ने दंड पाने के भय से उनके प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया | यहाँ तक की उनके राज कवि कालिदास ने भी दंड के भय से प्रश्नों के उत्तर नहीं दिए लेकिन उन्हीं के राज्य के एक हलवाहे ने अपनी सूझ-बुझ दिखाई और राजा के पास उन तीनों प्रश्नों का उत्तर देने के लिए पहुँच गया |


अब जैसे ही वह राज दरबार में पहुंचा उसे देखकर सभी दरबारी यह बोलने  लगे की भला यह हलवाहा इन प्रश्नों का क्या उत्तर देगा | लेकिन उस हलवाहे ने किसी की भी बातों पर ध्यान नहीं दिया और राजा के उन तीन प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार हो गया |



उसने राजा के पास जा कर पांच चाँदी के सिक्के मंगवाए तथा राजा से कहा कि इन्हें गिने | राजा ने गिनना प्रारंभ किया - एक ,दो ,तीन , ............पाँच | हलवाहे ने फिर कहा - "एक से पहले गिनिये |"


राजा ने कहा - "एक से पहले कोई अंक नहीं है |"

हलवाहे ने कहा - "ठीक इसी प्रकार भगवान से पहले भी कोई नहीं है |" इस तरह उसने राजा के पहले प्रश्न का उत्तर दे दिया |


अब उसने फिर राजा से घी मँगवाकर पूछा की यह किससे बनता है ? राजा ने कहा - "दूध से घी बनता है |"
हलवाहे ने राजा से कहा क्या आपको पक्का विश्वास है कि दूध से ही घी बनता है | राजा ने उत्तर दिया - हाँ | हलवाहे  ने कहा - जिस प्रकार दूध घी में ही रहता है ठीक उसी प्रकार भगवन आत्मा में रहते है |

इस तरह दुसरे प्रश्न का उत्तर सुनते ही  राजा ने उन्हें अपने राज सिंघासन  पर बैठा कर कहा कि आप इतने विद्वान होकर हल चलाते है | राजा ने पुनः कहा - "आपने मेरे दो प्रश्नों के उत्तर दे दिए अब आप मेरे तीसरे प्रश्न का उत्तर दें |"


हलवाहे ने कहा - "अभी कुछ देर पहले आप सिंहासन बैठे थे और मैं खड़ा था अब आप खड़े  है और मैं राज सिंहासन पर बैठा हूँ |' यही भगवन का काम है | एक मिनट में रजा को रंक और रंक को राजा बना देता है |


इस प्रकार अपनी बुद्धिमानी और सूझ-बुझ के आधार पर उस हलवाहे ने राजा के तीनों प्रश्नों का उत्तर दे दिया और सभी दरबारी गण देखते रह गए | और वचन के अनुसार राजा ने भी हलवाहे को अपना आधा राज्य दे दिया |













              
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