24 September 2016

पहचानिए अपनी छुपी हुई संपदा को (Motivational Story in Hindi)





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पहचानिए अपनी छुपी हुई संपदा को (Motivational Story in Hindi)

!! पहचानिए अपनी छुपी हुई संपदा को !!



एक बार एक भिखारी भीख मांग रहा था | एक कुशल ज्योतिषी ने उसके ललाट को देखा | वह भिखारी के पास आए और उनहोंने उससे कहा  - "तुम भीख क्यों मांग रहे हो ?"

भिखारी ने कहा - "मेरे पास कुछ नहीं है इसलिए भीख मांग रहा हूँ |"
ज्योतिषी ने विश्वास भरे स्वर में कहा - "तुम भिखारी नहीं हो , तुम्हारे पास बहुत कुछ है |"
भिखारी - "यदि कुछ होता तो भीख क्यों मांगता ?"
ज्योतिषी - "यह तुम्हारा अज्ञान है इसलिए भीख मांग रहे हो |"

भिखारी - "क्या मेरे पास बहुत संपदा है ?"
ज्योतिषी - "हाँ , तुम अपने कोट को खोलो |"
भिखारी ने वैसा ही किया | ज्योतिषी - "यह गले में क्या है ?"

भिखारी - "ताबीज है , पिताजी ने बाँधते हुए कहा था कि संकट में काम आएगा |"
ज्योतिषी बोले - "इसे खोलो |"
जब उस भिखारी ने उसे खोला तो उससे चमकता हुआ हीरा निकला |

ज्योतिषी ने कहा - "जिसके गले में ऐसा हीरा है , लाखों की संपदा है , वह भिखारी कैसे हो सकता है ?"
भिखारी ने कहा - "मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी |"

तब ज्योतिषी ने उससे कहा - "दुनिया में बहुत से लोग ऐसे है जिनके पास प्रचुर संपदा है किंतु अज्ञानता के कारण उसका उपयोग नहीं कर पा रहे है |"





Moral :- दोस्तों हमारे पास भी उस भिखारी की तरह ही प्रचुर संपदा है , किन्तु अपनी अज्ञानता के कारण हम सही से उनका प्रयोग नहीं कर पा रहे है और खुद को भिखारी मान बैठे है मतलब की हम कुछ नहीं कर सकते ...हमें कुछ नहीं आता ..........

तो चलिए दोस्तों उठिए और अपनी इस छुपी हुई संपदा को पहचानिए जिसके बल पर आप कुछ भी कर सकते है , कुछ भी बन सकते है ........ये संपदा कोई और नहीं बल्कि आपका अपना आत्मविश्वास , मेहनत , लगन , परिश्रम , धैर्य , सहस और हिम्मत है जिनका उपयोग करके आप महान बन सकते है और  प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त कर सकते है तो दोस्तों उठिए और लग जाइए .............









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 Note:    This inspirational Story is not my original creation .


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3 comments:

  1. एक बार की बात है रूस के ऑस्पेंस्की नाम के महान विचारक एक बार संत गुरजियफ से मिलने उनके घर गए। दोनों में विभिन्न् विषयों पर चर्चा होने लगी। ऑस्पेंस्की ने संत गुरजियफ से कहा, यूं तो मैंने गहन अध्ययन और अनुभव के द्वारा काफी ज्ञान अर्जित किया है, किन्तु मैं कुछ और भी जानना चाहता हूं। आप मेरी कुछ मदद कर सकते हैं? गुरजियफ को मालूम था कि ऑस्पेंस्की अपने विषय के प्रकांड विद्वान हैं, जिसका उन्हें थोड़ा घमंड भी है अतः सीधी बात करने से कोई काम नहीं बनेगा। इसलिए उन्होंने कुछ देर सोचने के बाद एक कोरा कागज उठाया और उसे ऑस्पेंस्की की ओर बढ़ाते हुए बोले-

    - Read more at: http://1stories1.blogspot.in/2016/08/ahankaar-chhodiye-aur-shikhna-shuru.html#more

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  2. नई विचारधारा की ये कहानी बहुत पसंद आई. इस कहानी में एक अच्छा सन्देश दिया गया है.

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