04 August 2016

ब्रम्हा जी के थैले (Moral Story in Hindi)





Good Moral and Motivational story in hindi Good Moral and Motivational story in hindi


!! ब्रम्हा जी के थैले !!


इस संसार को बनाने वाले ब्रम्हा जी ने एक बार मनुष्य को अपने पास बुला कर पूछा – “तुम क्या चाहते हो ?”

मनुष्य ने कहा – “मैं उन्नति करना चाहता हूँ | सुख-शांति चाहता हूँ और चाहता हूँ कि सब लोग मेरी प्रशंसा करे |”

ब्रम्हा जी ने मनुष्य के सामने दो थैले रख दिए | वे बोले इन थैलों को ले लो | इनमे से एक में तुम्हारी पड़ोसी की बुराईयाँ भरी है | उसे पीठ पर लाद लो | उसे सदा बंद रखना , न तुम देखना न दुसरे को दिखाना | दुसरे थैले में तुम्हारे दोष भरे है | उसे आगे लटका लो | बार-बार खोल-खोल कर देखना |




मनुष्य ने दोनों थैले उठा लिए | लेकिन उससे एक भूल हो गयी | उसने अपनी बुराईयों का थैला पीठ पर लाद लिया और उसे कस कर बंध कर दिया | अपने पड़ोसी की बुराईयों से भरा थैला उसने सामने लटका लिया | उसका मुँह खोल-खोल कर वह बार-बार देखता रहता था | 

इससे उसने जो वरदान मांगे थे वे भी उलटे हो गए | उसे दुःख और अशांति मिलने लगी | उसे लोग बुरा बताने लगे |



Moral :- इस कहानी से सीख मिलती है कि हमें दूसरों की बुराईयाँ नहीं देखनी चाहिए | अपनी गलती देखनी चाहिए | तभी मनुष्य उन्नति करता है |


“दूसरों को असफल करने के प्रयत्न ही हमें असफल बनाते है |”      - हरिशंकर परसाई 






Also read :-    सामना करो 
                मेहनत का भविष्य
                समय का महत्व
              उधार की लालटेन
              


                 .............................................................

loading...



Note :- This inspirational Story is not my original creation .


निवेदन :- कृपया   अपने   comments   के   माध्यम   से   जरुर   बताएं   की   आपको    यह    Story    कैसी    लगी    ‌‍‌‍......   और   यदि   आपको   यह   story   पसंद   आयी    तो   please   इसे   अपने   friends   के   साथ   जरुर   share   करे   |


यदि    आपके    पास    हिंदी    में    कोई    good   article,    poem, inspirational story, या  जानकारी  है , जो  आप  हमारे  साथ  share  करना  चाहते  है,  तो  कृपया हमसे contact करे(Contact Us) ,  पसंद  आने  पर   हम  उसे  आप  के  नाम  और  photo  के  साथ  यहाँ  publish  करेंगे , Thanks !






      

No comments:

Post a Comment